श्रीकृष्ण व नरसी मेहता

कितने जो – श्रीकृष्ण व नरसी मेहता कविता – १८

कितने जो – श्रीकृष्ण व नरसी मेहता कविता – १८


कितने जो ठट्ठे बाज़ थे जिस दम उन्होंने यह सुना।
दिल में हंसी की राह से, साधुओं से यूं जाकर कहा॥
एक नरसी महता है बड़े, सर्राफ़ यां के वाह! वा।
तुम दर्शनी हुंडी जो है, लो हाथ से उनके लिखा॥
है साख उनकी यां बड़ी, जितने यह साहूकार हैं॥१८॥


राम कृष्ण हरी आपणास या अभंगाचा अर्थ माहित असेल तर खालील कंमेंट बॉक्स मध्ये कळवा.

कितने जो – श्रीकृष्ण व नरसी मेहता कविता – १८

Leave a Comment

Your email address will not be published.